
लंबे अर्से बाद आज फिर एक बार दिल के सन्नाटे की तिजोरी खोलने का मौका मिला... काफी कुछ इकट्ठा हो चुका है इसमें। यहां यादें हैं, जज्बात हैं, गुस्सा भी है और अधूरी मुलाकातें भी... और भी बहुत कुछ।
कभी आपने सोचा है कि वक्त के इस सफर में हमने कितना कुछ पीछे छोड़ दिया? बचपन की वो निश्छल हंसी, दोस्तों के साथ बिताए गए बेपरवाह पल, परिवार के संग बैठकर साझा किए गए किस्से, रिश्तों में झलकता अपनापन.... इन सबकी कीमत हमें तब समझ आती है जब ये कहीं पीछे छूट जाते हैं। लेकिन क्या हम सिर्फ खोते ही जा रहे हैं, या फिर कुछ हासिल भी कर सकते हैं?
इस तिजोरी को खोलते ही हमें अहसास होता है कि वक्त बीत सकता है, लेकिन यादें, जज्बात और रिश्तों की गर्माहट हमेशा हमारे साथ रहती है। हमें यह सीखने की जरूरत है कि हम अपने समय, अपने परिवार, अपने रिश्तों और दोस्तों की अहमियत को समझें और उन्हें खोने से पहले संभाल लें। अगर हम आज अपनी जिंदगी में संतुलन बना लें, अपनों के साथ कुछ कीमती पल बिता लें, तो यह तिजोरी सिर्फ अधूरी मुलाकातों और पछतावे से नहीं, बल्कि खुशियों और संतोष से भरी होगी।
बचपन: मासूम हंसी और बेफिक्री के पल

जब हम तिजोरी के पहले खांचे को खोलते हैं, तो सबसे पहले हमारे बचपन की मीठी यादें उभरती हैं। वो गलियों में दौड़ते हुए खेलना, मां की गोद में सिर रखकर सो जाना, और बिना किसी चिंता के सपनों में खो जाना। हम सबका बचपन मासूम हंसी और बेफिक्री से भरा होता है, लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, जिम्मेदारियां हमें घेर लेती हैं और इस बेफिक्री कहीं न कहीं चिंता हावी होती जाती है। चिंता....इसे तो जानते ही होंगे।
जब हम जवां थे: सपनों की उड़ान और अधूरे अरमान

यह वह वक्, होता है जब हमारे सपनों को पंख लग रहे होते हैं। करियर की दौड़, पहली मोहब्बत, दोस्ती के अटूट रिश्ते.... आज सब कुछ किसी फिल्मी कहानी की तरह लगता है। लेकिन क्या हर सपना पूरा होता है? शायद हां या नहीं भी। कई बार हम कुछ पाना चाहते हैं लेकिन हालात या किस्मत हमें उस राह पर नहीं चलने देते। फिर चाहे पसंदीदा करियर हो, पहला प्यार या ............ यहां आप भर लो न। यही जिंदगी का सच है।
ऐसे में कभी कॉलेज के दिनों में किसी दोस्त से किया गया वादा, तो कभी किसी से किया गया अनकहा प्यार—सब इस तिजोरी में जमा होता चला जाता है।
हैं कुछ अधूरी मुलाकातें: एक कसक जो हमेशा दिल में रहती है

इस तिजोरी का सबसे भावुक हिस्सा वह अधूरी मुलाकातें हैं, जो किसी न किसी मोड़ पर छूट जाती हैं। कोई दोस्त जिससे आखिरी बार मिलने की चाह थी, कोई प्यार जो मुकम्मल न हो सका, कोई अपना जिससे गले लगकर रोने की ख्वाहिश थी, लेकिन वक्त ने मौका नहीं दिया।
हर किसी की जिंदगी में ऐसे लोग होते हैं, जिनसे दोबारा मिलने की चाह दिल में रहती है, लेकिन हालात कभी उन्हें पास नहीं लाते। यह अहसास ही हमें जिंदगी के मायने समझाता है और जिंदगी को और पॉजिटिव तरीके से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है.....है न कोई आपकी जिंदगी ऐसा कोई!
अचीवमेंट्स : सफलताओं की असली कीमत

इस तिजोरी में सिर्फ यादें और अधूरी कहानियां नहीं हैं, बल्कि कई उपलब्धियां भी हैं। वो पहला प्रमोशन, परीक्षा में अच्छे नंबरों से पास होना, अपने दम पर हासिल किया हुआ कोई बड़ा मुकाम—यह सब हमें याद दिलाते हैं कि हमने सिर्फ खोया नहीं, बल्कि बहुत कुछ पाया भी है।
लेकिन इन सफलताओं के बाद क्या हमें लगता है कि हम सच में जीत गए? कई बार सफलता के साथ अहंकार भी आ जाता है, और यही वह मोड़ होता है जहां हमारी सबसे बड़ी जीत भी अर्थहीन हो जाती है। अगर कोई सफलता हमें अपनों से दूर कर दे, हमें रिश्तों की अहमियत भूलने पर मजबूर कर दे, तो क्या वह सच में एक उपलब्धि कही जाएगी?
इसलिए, सफलता का असली आनंद तभी है जब वह हमें और विनम्र बनाए, जब वह हमें अपनों के करीब ले जाए और जब वह हमें यह अहसास कराए कि असली उपलब्धि सिर्फ ऊंचाई तक पहुंचना नहीं, बल्कि वहां पहुंचकर भी ज़मीन से जुड़े रहना है.... तो अपने अब तक के बड़े अचीवमेंट को याद करें और आगे बढ़ें।
गुस्सा और फिर पछतावा: क्या वाकई ज़रूरी था?

हमारी तिजोरी में गुस्से और पछतावे का भी बड़ा हिस्सा होता है। कई बार हम गुस्से में अपनों से ऐसी बातें कह देते हैं, जो उन्हें और हमें दोनों को ही दुख पहुंचा देती हैं। कुछ सालों बाद जब हम उन्हीं लम्हों को याद करते हैं, तो लगता है कि काश उस वक्त थोड़ा धैर्य (Patience) रखा होता तो उसके बाद हुए हर रिएक्शन को हम रोक सकते थे। आज की हमारी जिंदगी में ये गुस्सा जहन में चिपक सा गया है, जो जब चाहे... जहां चाहे बाहर निकल आता है। यह इतना बेशर्म है कि इसके चक्कर में हम कितना कुछ खो रहे हैं, इसका हमें अंदाजा होकर भी नहीं होता।
क्या आपने कभी सोचा है कि जो गुस्सा हमें उस वक्त सही लगता था, वह आज कितना बेवजह लगता है?
लेकिन अफसोस, बीता हुआ वक्त लौटकर नहीं आता।
जिंदगी की असली सीख: अपने पलों को संजोएं

इस तिजोरी में सिर्फ यादें नहीं, बल्कि जिंदगी के असली सबक भी छुपे होते हैं। यह हमें सिखाते हैं कि हर छोटी खुशी को संजोकर रखना चाहिए, क्योंकि वक्त कभी किसी के लिए नहीं रुकता। बावजूद हम रोज इन छोटे पलों का गला घोंट देते हैं। क्यों..... सिर्फ और सिर्फ अपने गुस्से, अहम के वश में आकर।
परिवार के साथ बिताया गया समय अनमोल है, क्योंकि माता-पिता हमेशा हमारे साथ नहीं रहेंगे। दोस्तों के साथ हंसी-मजाक जरूरी है, क्योंकि यही वो रिश्ते हैं जो उम्रभर साथ चलते हैं। मोहब्बत को खुलकर जताना चाहिए, एक बार कहना जरूरी होता है क्योंकि अधूरी मोहब्बतें सिर्फ अफसोस छोड़ जाती हैं। गुस्से को संभालना सीखें, क्योंकि एक गलत शब्द सालों के रिश्ते को तोड़ सकता है।
तिजोरी खोलिए, अहसासों को जी लीजिए
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All photos credit to Meta AI |
हर इंसान की अपनी एक जिंदगी की तिजोरी होती है, जिसमें उसकी यादें, खुशियां, गम, सपने और अधूरे अरमान भरे होते हैं। कभी-कभी हमें यह इसे खोलकर खुद से रूबरू होना चाहिए। यह हमें जिंदगी को और बेहतर तरीके से जीने की सीख देती है।
तो आज ही अपनी पुरानी यादों को फिर से महसूस कीजिए, अपनों को गले लगाइए और जिंदगी को पूरी शिद्दत से जीने का संकल्प लीजिए।